वो  विशेषताएँ जो विश्व में सिर्फ भारतीय सेना के पास है

Best features of Indian army: विश्व में लगभग सभी देशो के पास अपने देश की सीमाओं की रक्षा और आंतरिक आपदाओं से निपटने के लिए आधुनिक सेना है। भारतीय सेना भी विश्व की तीसरी सबसे बड़ी सेना है जो की दुश्मन के लिए एक मौत की मशीन के सामान है।आज के समय, देशो में आधुनिक हथियार बनाने और खरीदने की प्रतिस्पर्धा है। भारत भी हमेशा से आधुनिक हथियारों का संग्रह करता आया है।

लेकिन आधुनकि हथियारों के साथ साथ भारतीय सेना की कुछ ऐसे खास विशेषताएँ है जो विश्व में किसी के पास नहीं है और भारतीय सेना को महान बनाती है।

1. देश को माँ का दर्जा

भारत एक इकलौता देश है जहा लोग अपने देश को माँ का दर्जा देते है। भारतीय सेना में भर्ती ज्यादातर लोग स्वैछा से भारत माता की रक्षा के लिए भर्ती होते है। दिल में माँ की रक्षा का जूनून उन्हें बिना किसी निजी लालच के सीमा पर लेकर चला आता है। युवा दिलों में मातृभूमि की सेवा करने की ललक होती है, इसलिए उनकी आखरी साँस दुश्मन के लिए एक जिन्दा सैनिक की तरह होती है और दुश्मन पर कहर बन कर टूटती है।

2. ऊँचे स्थानों पर लड़ने में सक्षम

भारत में सीमावर्ती इलाकों में ज्यादातर पहाड़ी इलाके हैं, भारतीय सेना पहाड़ों में सच्चे योद्धाओं की तरह लड़ने में माहिर हैं। यह दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर को नियंत्रित करती है, जो समुद्र तल से 5000 मीटर ऊपर है और जहा -50 डिग्री तापमान रहता है।

भारतीय सेना के हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल (HAWS) को दुनिया के सबसे अधिक विशिष्ट प्रशिक्षण केंद्रों में से एक माना जाता है। यह HAWS गुलमर्ग में समुद्र तल से 9,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है जहां सेना के लोग जीवित रहना और दुनिया की सबसे ऊंची जगह पर लड़ाई करना सीखते है।

3. शौर्य और पराक्रम

भारतीय सेना के पास 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान सबसे बड़े सैन्य आत्मसमर्पण को स्वीकार करने का रिकॉर्ड है जब 93,000 पाकिस्तानी सेना के सैनिकों को बंदी बनाया गया। भारतीय सेना ने वीरता और पराक्रम दिखाते हुए मात्र 13 दिन में पाकिस्तान को घुटने पर ला दिया था।

भारत चीन 1962 युद्ध के दौरान राइफल मेन जसवंत सिंह रावत अकेले ही तीन दिन तक चीनी सेना की आँख में धूल झोकते हुए लोहा लेते रहे और 300 सैनिको को मौत के घाट उतार दिया। मरणोपरांत चीन ने जसवंत सिंह रावत के शौर्य और पराक्रम को सम्मानित करते हुए, जिस पोस्ट पर युद्ध लड़ा गया उस का नाम बदलकर जसवंत गढ़ रख दिया।

परम वीर चक्र से सम्मानित कैप्टन विक्रम बत्रा ने कहा था ” मैं तिरंगा फहराकर वापस आऊंगा या फिर तिरंगे में लिपटकर आऊंगा, लेकिन मैं वापस अवश्य आऊंगा।”

भारतीय सेना ने अनेको बार शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन किया है जिससे पूरा विश्व परिचित है।

4. अनुशासित और पेशेवर

भारतीय सेना में सैनिक अपने कर्तव्य के प्रति लगन और समर्पण के लिए जाने जाते हैं। अगर कोई काम करना है, तो उसे पूरा करना होगा और वह भी पूरी तरह से। कोई भी काम छोटा नहीं होता और कुछ भी महत्वहीन नहीं होता है।

इंडियन आर्मी कभी भी पहले युद्ध की शुरुआत नहीं करती और अगर कोई हमला करता है तो उसे ईंट का जवाब पत्थर से देती है। मयंमार और पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक करके यह साबित कर दिया कि भारतीय सेना एक पेशेवर सेना है जो दुश्मन को घर में घुसकर मारना जानती है।

भारतीय सेना लक्ष्य प्राप्ति के संकल्पित रहती है चाहे कितनी भी बड़ी बाधाएं क्यों न हो। कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन उचाई पर था और भारतीय सेना असुविधाजनक स्थिति में थी लेकिन लक्ष्य प्राप्त करने का संकल्प और टीम में विश्वास, इसी भावना के साथ भारतीय सेना ने कारगिल की चोटी पर फिर से तिरंगा लहराया।

5. नैतिकता

सैनिक चाहे दुशमन देश का हो या अपने देश का मरणोपरांत भारतीय सेना व्यक्तिगत रूप से कोई भेदभाव नहीं करती। दुशमन के शव के साथ बर्बरता जैसी अनैतिक कृत्य कभी नहीं किया जाता। दुश्मन के मृत शरीर को सम्मानपूर्वक उसके देश को सौंप दिया जाता है।

झूट, फरेब , धोखा जैसे शब्द भारतीय आर्मी की डिक्शनरी में नहीं है, यह दुश्मन को सामने से लड़ते हुए मारना जानती है। देश की सुरक्षा, सम्मान और कल्याण, भारतीय सेना के लिए सबसे पहले है, खुद की सुविधा, आराम और सुरक्षा उसके बाद रखती है।

भारतीय सेना सीमा सुरक्षा और युद्ध नियमो का ईमानदारी से पालन करती है।

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