केंद्र सरकार ने इंटरनेट मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए जारी की नई गाइडलाइन्स, 24 घंटे में हटानी होगी आपत्तिजनक पोस्ट।

3 महीनों में जारी होंगे नये नियम और सीमाएँ, हिंसा फैलाने वालों पर कसेगा शिकंजा…

सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर हिंसा फैलाने वालों व भारत मे काम कर रही मीडिया कंपनियों के डॉबल स्टैंडर्ड वाले व्यवहार को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कुछ वक्त पहले विशेष गाइड लाइन बनाने का आदेश दिया था।

पिछले काफी समय से ऐसे मुद्दों के विरुद्ध बहुत अधिक शिकायतें आने लगी थी क्योंकि अपराधी जम कर इनका इस्तेमाल करने लगे हैं। इस पर संसद और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने चिंता व्यक्त की थी।

इसी के तहत ये तय किया गया था कि मीडिया के काम करने का भी एक प्रॉपर मेकेनिज़्म होना चाहिए।

इसीलिए केंद्र सरकार ने इंटरनेट मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म के लिए नई गाइडलाइन्स जारी कर दी है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि सोशल मीडिया को दो श्रेणियों में बांटा गया है, एक इंटरमीडरी और दूसरा सिग्निफिकेंट। भारत में वाट्सएप के 53 करोड़, फेसबुक के 40 करोड़ यूजर हैं। ट्विटर पर एक करोड़ से अधिक यूजर हैं। लेकिन जो चिंताए जाहिर की जाती है उनपर काम करना जरूरी है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ओटीटी और डिजिटल मीडिया के लिए तीन स्तरीय व्यवस्था की गयी है, हमें ओटीटी के लिए नियम बनाने की मांग को लेकर हर दिन सैकड़ों पत्र आ रहे हैं। मंत्री ने कहा कि अब सभी मीडिया के लिए एक नियम होगा और इन्हें ध्यान में रखते हुए सरकार नियम बनाये है।

सरकारी गाइडलाइंस की अहम बातें:
• किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट को 24 घंटे में हटाना होगा।
• सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अफसरों की तैनाती करनी होगी।
• हर महीने कितनी शिकायतों पर एक्शन लिया गया, इसकी जानकारी देनी होगी।
• अफवाह फैलाने वाला पहला व्यक्ति कौन है उसकी जानकारी देनी होगी।
• ओटीटी प्लेटफॉर्म और डिजिटल मीडिया को अपने काम की जानकारी भी साझा करनी पड़ेगी। उन्हें बताना होगा कि वो कैसे अपना कंटेंट तैयार करते हैं।

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