लॉकडाउन में पूर्ण वेतन का भुगतान नहीं करने के लिए नियोक्ताओं के खिलाफ कोई जबरदस्त कार्रवाई नहीं: सुप्रीम कोर्ट
कोरोना लॉकडाउन के 54 दिनों के दौरान कर्मचारियों को पूर्ण वेतन का भुगतान करने के केंद्र सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली निजी कंपनियों की दायर याचिका के बारे में शुक्रवार को एक बहुप्रतीक्षित निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वे नियोक्ताओं के लिए कोई भी कठोर कार्रवाई करने से परहेज करें।
सर्वोच्च न्यायालय ने माध्यम लघु उद्योग सहित कई कंपनियों द्वारा दायर कई याचिकाओं पर अपने निर्णय की घोषणा की जिसमें गृह मंत्रालय द्वारा महामारी को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन की 54 दिनों की अवधि के दौरान कर्मचारियों को पूर्ण वेतन और भुगतान करने के आदेश को चुनौती दी गई है।केंद्र को एक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट के जज न्यायमूर्ति भूषण ने कहा, “हमने नियोक्ताओं के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया है। हमारे पहले के आदेश जारी रहेंगे। केंद्र द्वारा जुलाई के अंतिम सप्ताह में एक विस्तृत हलफनामा दायर किया जाना है। राज्य सरकार के श्रम विभागों द्वारा कर्मचारियों और नियोक्ताओं के बीच बातचीत को सुगम बनाना ज़रूरी है।’

‘उद्योग और कर्मचारी परस्पर एक दूसरे पर निर्भर हैं, इसलिए उन्हें इस समस्या का एक सौहार्दपूर्ण समाधान खोजना होगा। अदालत ने केवल पक्षों को चर्चा करने और इस मुद्दे पर एक मध्य मार्ग खोजने का निर्देश दिया है।’

अदालत ने 4 जून को देखा था कि नियोक्ताओं और श्रमिकों के बीच कुछ वार्ताएं ज़रूरी हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि 54 दिनों के लिए वेतन के लिए क्या किया जाना है।

न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की एक पीठ जिसमें न्यायाधीश संजय किशन कौल और एम आर शाह शामिल थे, जो इन याचिकाओं के एक बैच पर सुनवाई कर रहे थे, जो इस लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों को वेतन देने का निर्देश देने की मांग कर रहे थे।

प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन के दौरान राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में नियोक्ताओं से अपने लकर्मचारियों के प्रति नरमी बरतने और उनका वेतन नहीं काटने का आग्रह किया था।

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