क्या कोरोना वैक्सीन के नकारात्मक प्रभाव हो सकते है? जानें

क्या होती हैं वैक्सीन और ये कैसे काम करती है? भारत मे कौन-सी वैक्सीन का निर्माण हुआ है?

भारत सहित दुनियाभर में कोरोना वैक्सीन टीकाकरण अभियान शुरू हो चुका हैं। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि वैक्सीन क्या होती है? यह कैसे काम करती है और आखिर इसके क्या-क्या साइड इफेक्ट हो सकते हैं? या फिर ये कितनी सेफ हैं? लोगों के ये सभी सवाल उन्हें चिंता में डाले हुए हैं और इसीलिए पूरी जानकारी के आभाव में वे वैक्सीन लगवाने से भी डर रहे हैं। तो चलिए सरल भाषा में समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर वैक्सीन क्या है और कैसे काम करती है?

वैक्सीन एक तरह से आपके शरीर को बीमारी या संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती हैं। वैक्सीन सामान्य दवाइयों की तरह बीमारी का इलाज नहीं करती बल्कि बीमारी को होने से रोकती है, इसलिए ये बहुत अधिक शक्तिशाली होती हैं। दरअसल वैक्सीन में कुछ निष्क्रिय या कमज़ोर जीव होते हैं। जिन्हें आपके शरीर में डाला जाता है। जैसे ही ये कमजोर या निष्क्रिय जीव शरीर में प्रवेश करते हैं, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली(इम्यून सिस्टम) इनकी पहचान कर इनके खिलाफ एंटी बॉडी बनाने लगती है।

कुल मिलाकर इस तरह वैक्सीन द्वारा संक्रमण या आक्रमणकारी वायरस की शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को पहचान कराई जाती हैं। फिर बाकी काम तो हमारा चमत्कारी शरीर खुद ही पूरा कर लेता हैं। फिर क्या है, शरीर का इम्यून सिस्टम कुछ ही समय में मज़बूत बनकर स्वयं उस रोग से लड़ने के लिए तैयार हो जाता हैं।

भारत मे निर्मित वैक्सीन

भारत में दो टीके तैयार किए गये हैं- एक का नाम है कोविशील्ड जिसे एस्ट्राज़ेनेका और ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने तैयार किया और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया इसका उत्पादन कर रहा है और दूसरा टीका है कोवैक्सीन, जो भारतीय कंपनी भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया हैं।

भारतीय वैक्सीन का टीका जिन लोगों को अब तक लगाया गया है, उनमे से 90% लोगो पर अभी तक इनके कोई भी नकारात्म प्रभाव नही आये हैं। केवल 10% लोगों में ही अब तक बिल्कुल हल्के ओर सामान्य नकारात्म प्रभाव देखें गए हैं और इसके भी केवल 0.02% लोगो को ही अस्पताल में भर्ती कराया गया हैं। खास बात यह है कि अभी तक किसी भी व्यक्ति की जान को जोखिम जैसी समस्या सामने नही आई हैं।

क्या हो सकते है वैक्सीन के नकारात्मक प्रभाव

वैक्सीन को आधुनिक दुनिया की सबसे बड़ी चिकित्सकीय उपलब्धियों में से एक माना जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, टीकों की वजह से हर साल क़रीब बीस से तीस लाख लोगों की जान बचाई जाती हैं। टीकाकरण में कुछ जोखिम ज़रूर हैं, लेकिन सभी दवाओं की ही तरह, इसके फ़ायदों के सामने वो कुछ भी नहीं।

ऐसा नहीं है कि हर वैक्सीन के बाद एक ही तरह के साइड इफ़ेक्ट देखने को मिले। कई बार लक्षण अलग-अलग भी होते हैं। ये इस बात पर निर्भर करता है कि वैक्सीन बनाने का तरीक़ा क्या है और जिसको लगाया जा रहा है उसके शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कैसी है। साथ ही जिस व्यक्ति को वैक्सीन लागई जा रही है, उसे वैक्सीन के किसी घटक से कोई विशेष समस्या ना हो।

वैसे भारतीय कोरोना वैक्सीन के अब तक अन्य टीको की तरह सामान्य नकारात्म प्रभाव ही देखने को मिले हैं, जिनमें बुखार, टीका लगने वाली जगह पर हल्की सूजन या खारीश , बदन दर्द, एलर्जी और घबराहट शामिल हैं। कुल मिलाकर भारतीय वैक्सीन सुरक्षित हैं।

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